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About Founder: Shankar Ganeerupu Is The One Who Found "SpiritualYogi" And He Is The Spiritual Yoga Sadhak and Philosopher.Our Website Main Aim To Promote Our Sanathan Dharm.
कर्म योग का श्लोक
- श्लोक: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि। [1, 2]
- अर्थ: तेरा कर्म करने पर ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। तू कर्मों के फल का हेतु मत बन और तेरी अकर्मण्यता (काम न करने) में भी आसक्ति न हो। [1]
धर्म स्थापना का श्लोक
- श्लोक: यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। [1]
- अर्थ: हे अर्जुन! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं की रचना करता हूँ (प्रकट होता हूँ)। [1]
आत्मा की अमरता का श्लोक
- श्लोक: नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः। [1]
- अर्थ: आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है और न हवा उसे सुखा सकती है। [1, 2]
शरणागति का श्लोक
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